Vrat Poojan Katha (सत्यनारायण व्रत पूजन कथा )

सत्यनारायण व्रत पूजन कथा

 
 कभी भी आप किसी भी देव की पूजन कथा, किसी भी तीर्थ स्थान या अपने घर पर आयोजित कर सकते है, प्रचलित कथाओं में सत्यनारायण भगवान की कथा मुख्य है।
 
सत्यनारायण भगवान की कथा लोक में प्रचलित है। हिंदू धर्मावलंबियों के बीच सबसे प्रतिष्ठित व्रत कथा के रूप में के सत्य स्वरूप की सत्यनारायण व्रत कथा है। सत्यनारायण व्रतकथा स्कन्दपुराण के रेवाखंड से संकलित की गई है।
 
सत्य को नारायण विष्णु के रूप में पूजना ही सत्यनारायण की पूजा है। इसका दूसरा अर्थ यह है कि संसार में एकमात्र नारायण ही सत्य हैं, बाकी सब माया है।
 
भगवान की पूजा कई रूपों में की जाती है, उनमें से उनका सत्यनारायण स्वरूप इस कथा में बताया गया है। इस कथा के दो प्रमुख विषय हैं- जिनमें एक है संकल्प को भूलना और दूसरा है प्रसाद का अपमान।
 
व्रत कथा के अलग-अलग अध्यायो में छोटी कहानियों के माध्यम से बताया गया है कि सत्य का पालन न करने पर किस तरह की परेशानियां आती है। इसलिए जीवन में सत्य व्रत का पालन पूरी निष्ठा और सुदृढ़ता के साथ करना चाहिए।  प्रत्येक माह की पूर्णिमा को आप यह कथा पूजन करवा सकते है।
 
इन्हें प्रसाद के तर फल, मिष्ठान के अलावा आटे को भूनकरउसमें चीनी मिलाकर एक प्रसाद बनता है, इस प्रसाद का भोग लगता है।
 
Satyanarayan Vrat Poojan Katha

 

At such times, one can organize any Dev's Poojan Katha in any pilgrimage place or at one’s home; the story of Satyanarayan Bhagwan is in the main stories.

 

The story of Satyanarayan Bhagwan is popular in folk. Satyanarayan Vrat Katha’s true form is the most revered poetry amongst the Hindu Dharma. Satyanarayan Vrata Katha has been compiled from the Rekha and of Skandapuraan.

 

To worship Satya as Narayan Vishnu is the worship of Satyanarayan. The second meaning is that only Narayana is the only truth in the world, the rest is Maya.

 

God is worshiped in many forms; among them, his Satyanarayan form has been described in this story. There are two main topics in this story- one of which is to forget the resolution and the second is the insult of Prasad.

 

In different chapters of the fast legend,it is told through the stories that what kind of problems arises when it does not follow the truth. Therefore, the practice of truth fast in life should be done with complete fidelity and strength. By the way, one can do this story anytime, but one can make it a puja to be perform in every month's full moon.

 

On the basis of offerings, one can offer fruits along with Prasad, which is made by mixing sugar with dough. 

 

Note: 

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Price : Rs. 5100.00